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सक्ति में बॉयलर ब्लास्ट में 16 मजदूरों की मौत, 36 झुलसे, मुआवजे में 35-35 लाख और नौकरी का ऐलान, सीएम बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे...

15 Apr 2026  

सक्ति में बॉयलर ब्लास्ट में 16 मजदूरों की मौत, 36 झुलसे, मुआवजे में 35-35 लाख और नौकरी का ऐलान, सीएम बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे...

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छत्तीसगढ़ के सक्ति जिला में मंगलवार दोपहर बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट से 16 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 36 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसा इतना भीषण था कि 4 मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। बाकी घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया—5 की मौत रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, 5 की जिला अस्पताल रायगढ़ और 2 की रायपुर के निजी अस्पताल में हुई। 

अब तक जिन मृतकों की पहचान हो सकी है, उनमें ठंडाराम, पप्पू कुमार, अमृत लाल पटेल (50) और उत्तर प्रदेश के बृजेश कुमार शामिल हैं। बाकी मृतकों की शिनाख्त जारी है। हादसे के बाद कुछ मजदूरों के लापता होने की भी खबर है, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। 

परिजनों का हंगामा, प्रबंधन पर गंभीर आरोप 

घटना के बाद प्लांट के बाहर मजदूरों के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उनका आरोप है कि प्रबंधन न तो सही जानकारी दे रहा है और न ही लापता मजदूरों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब दे रहा है। आक्रोशित परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। 

जांच के आदेश, जिम्मेदारी तय होगी 

कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने पूरे मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि हादसे की वजह और जिम्मेदारों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

मुआवजे का ऐलान: कंपनी और सरकार दोनों आगे आए 

वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और नौकरी देने का ऐलान किया है, जबकि घायलों को 15-15 लाख रुपए देने की बात कही है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से भी सहायता घोषित की गई है—मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए मिलेंगे। 

वहीं विष्णुदेव साय ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। 

सवाल वही—सुरक्षा में चूक या लापरवाही? 

इतने बड़े औद्योगिक हादसे ने एक बार फिर प्लांट सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह तकनीकी खामी थी या लापरवाही—जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल 16 घरों में मातम पसरा है।
 

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