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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत का फर्जी मामला तैयार कर शासन को 17 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाने वाले बड़े मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने वाली सिम्स की तत्कालीन महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को जेल भेजने के बाद अब जांच का दायरा तहसील कार्यालय तक पहुंच गया है। सरकंडा पुलिस ने रविवार के अवकाश के दिन त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के तीन बाबुओं (क्लर्कों) को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए राजस्व कर्मचारियों में एसडीएम ऑफिस के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार का क्लर्क हरिशंकर राठौर शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपनी सरकारी आईडी का दुरुपयोग कर फर्जी केस रजिस्टर्ड किए और फर्जी रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा राशि का बंदरबांट किया।
यह पूरा घोटाला तब उजागर हुआ जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए बिलासपुर जिले में सर्पदंश के फर्जी आंकड़ों से 17.24 करोड़ रुपए की आर्थिक हेराफेरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह खुद पूरी जांच की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस फर्जीवाड़ा कांड में अब तक कुल 14 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले हर एक अधिकारी व कर्मचारी की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज रही है। जांच की आंच अब पिछले पांच वर्षों के दौरान ऐसी संदिग्ध रिपोर्ट्स जारी करने वाले दर्जनों अन्य डॉक्टरों तक भी पहुंच गई है, जिनसे पुलिस की गहन पूछताछ जारी है।
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20 Feb 2023
20 Feb 2023