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शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय और सिम्स (SIMS) अस्पताल, बिलासपुर के दंत चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और बेहद जटिल सर्जरी कर 24 वर्षीय युवक को नया जीवन दिया है। मुंगेली जिले के अमली कापा निवासी यह युवक बचपन में लगी चोट के कारण 'बाइलेटरल टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट (B/L TMJ) एंकिलोसिस' बीमारी का शिकार था। इसका असर यह हुआ कि उसके निचले जबड़े की वृद्धि रुक गई और वह वर्षों से केवल तरल आहार लेने को मजबूर था। पर्याप्त पोषण न मिलने से वह शारीरिक दुर्बलता और कुपोषण से भी जूझ रहा था। निजी अस्पतालों में 3 लाख रुपये से अधिक का खर्च सुनकर परिजनों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन सिम्स अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत उसका पूरी तरह से मुफ्त इलाज किया गया।
6 से 7 घंटे चली सर्जरी, आधुनिक तकनीक का हुआ इस्तेमाल
मरीज का मुंह पूरी तरह बंद होने के कारण एनेस्थीसिया (बेहोशी) देने के लिए डॉक्टरों ने पहले 'ट्रेकियोस्टॉमी' कर श्वास नली स्थापित की। इसके बाद डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन और ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश की टीम ने करीब 6 से 7 घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में 'डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस' तकनीक का इस्तेमाल कर निचले जबड़े को लंबा करने की प्रक्रिया शुरू की। दोनों ओर विशेष डिस्ट्रैक्शन डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे अगले 3-4 महीनों में जबड़ा धीरे-धीरे सामान्य आकार में आ जाएगा। सर्जरी के बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई है और नियमित फॉलोअप में अब उसका मुंह खुलने लगा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने रचा इतिहास
इस सफल सर्जरी में डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी किनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. सोनल पटेल समेत निश्चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति और रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह का विशेष योगदान रहा। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि सिम्स अब आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों के समन्वय से ऐसे दुर्लभ और जटिल केसों का मुफ्त इलाज करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
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23 Jul 2026
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