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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन आज प्रश्नकाल के दौरान राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था और नल-जल योजना की स्थिति का मामला प्रमुखता से उठा. सत्तापक्ष के ही वरिष्ठ सदस्यों ने अपनी सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए विभागीय दावों और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े किए. रायपुर में अमृत मिशन योजना के तहत नागरिकों को पर्याप्त पेयजल न मिलने तथा जल प्रदाय के लक्ष्यों में आ रही बाधाओं को लेकर लोक प्रतिनिधियों ने चिंता व्यक्त की, जिस पर विभागीय मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आवश्यक सुधार और परीक्षण का आश्वासन दिया है.
सदन में विषय की शुरुआत करते हुए वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने रायपुर में संचालित अमृत मिशन योजना के दायरे को लेकर सवाल पूछा. उन्होंने जानना चाहा कि क्या यह योजना मात्र 25 वार्डों के लिए स्वीकृत की गई थी अथवा संपूर्ण रायपुर शहर के लिए? साथ ही उन्होंने सीमित वार्डों में क्रियान्वयन के चयन का आधार भी पूछा. इस पर नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वित्तीय प्रावधानों और राशि की उपलब्धता के अनुरूप वर्तमान में 20 वार्डों में कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 25 वार्डों में आंशिक उपलब्धता के साथ कार्य किया गया है. उन्होंने सदन को अवगत कराया कि रायपुर शहर में पेयजल सुदृढ़ीकरण से संबंधित 304 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं.
चर्चा के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि शहर के लगभग 1 लाख 21 हजार घरों तक अभी सुचारू रूप से पानी नहीं पहुंच पा रहा है. सदस्यों ने प्रश्न उठाया कि क्या इस महत्वपूर्ण परियोजना का निर्धारण केवल कुछ वार्डों को ध्यान में रखकर किया गया था या पूरे महानगर के लिए? इस पर मंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया कि किसी भी वृहद पेयजल योजना का निर्धारण संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के मानकों के आधार पर ही तय किया जाता है.
इस गंभीर विषय पर हस्तक्षेप करते हुए वरिष्ठ विधायक सुनील सोनी ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि नागरिकों को निरंतर (24 घंटे) स्वच्छ जल प्रदाय करने का आश्वासन दिया गया था, किंतु प्रशासनिक शिथिलता के कारण वर्तमान में 2 लाख से अधिक परिवारों को पेयजल संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से भावी कार्ययोजना की जानकारी मांगते हुए पूछा कि चंगोराभाठा वार्ड और भक्त माता कर्मा वार्ड जैसे सघन क्षेत्रों में आज भी टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति करने की नौबत क्यों आ रही है? इसी क्रम में विधायक राजेश मूणत ने भी नगरीय निकायों की कार्यक्षमता पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या विभाग के पास रायपुर की जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की कोई निश्चित समय-सीमा या कार्ययोजना है? इन सभी विषयों पर विभागीय मंत्री अरुण साव ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि सभी नगरीय निकायों के आयुक्तों को पत्र जारी कर पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं.
राजधानी के अतिरिक्त ग्रामीण अंचलों में संचालित नल-जल योजना की क्रियान्वयन स्थिति पर भी सदन में तीखी चर्चा हुई. विधायक भैयालाल राजवाड़े ने कोरिया जिले का संदर्भ देते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के दावों पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कई स्थानों पर केवल जल मीनार (पानी टंकी) का निर्माण कर दिया गया है और घरों के बाहर नल की टोटियां लगा दी गई हैं, परंतु उनमें जल की आपूर्ति अब तक प्रारंभ नहीं हो सकी है. इस विशिष्ट शिकायत को संज्ञान में लेते हुए विभागीय मंत्री अरुण साव ने दोहराया कि ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध जल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में सर्वोपरि है. उन्होंने माननीय सदस्य से आग्रह किया कि वे इस संबंध में स्थानवार लिखित शिकायत उपलब्ध कराएं, ताकि विभाग उसका त्वरित तकनीकी परीक्षण कराकर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कदम उठा सके.
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