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भारतीय राजनीति में दशकों तक भूचाल लाने वाले और 40 साल पुराने चर्चित बोफोर्स तोप सौदा रिश्वत मामले में सभी कानूनी रास्ते अब पूरी तरह बंद हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले से जुड़ी अंतिम याचिका को खारिज करते हुए कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील अजय के अग्रवाल की उस अपील को सुनने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के 2005 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने हिंदूजा भाइयों (श्रीचंद, गोपीचंद व प्रकाशचंद) और स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी 'एबी बोफोर्स' को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दिवंगत श्रीचंद पी. हिंदूजा और गोपीचंद पी. हिंदूजा के नाम हटाने के लिए अदालत से और समय मांगा था, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने इसे ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले को अब और लंबा खींचने का कोई औचित्य नहीं है। पीठ ने कहा कि जब दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही सभी आरोप रद्द कर चुका है और सीबीआई की अर्जी भी पूर्व में खारिज हो चुकी है, तो कार्रवाई आगे बढ़ाने की कोई वजह नहीं बचती। बता दें कि 24 मार्च 1986 को भारतीय सेना के लिए 400 तोपें (हाउवित्जर) खरीदने हेतु स्वीडिश कंपनी से ₹1,437 करोड़ का समझौता हुआ था, जिसमें 1987 में स्वीडन रेडियो के घूस के दावों के बाद देश में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया था।
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07 Aug 2026
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20 Feb 2023
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