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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा, जिसके चलते प्रश्नकाल के दौरान जोरदार हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही सबसे पहले गैर मछुआ समाज के लोगों को नियमों के विरुद्ध जाकर समूह पट्टा आवंटित करने का मामला गूंजा, जिसे कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने प्रमुखता से उठाया।
इसके ठीक बाद सहकारी समितियों में उर्वरक (खाद) आवंटन में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने इस मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि सहकारी समितियों में खाद आवंटन का जो रेशियो सरकारी आदेश में तय किया गया है, वह हकीकत से बिल्कुल अलग है।
उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि विधानसभा में उनके प्रश्न के लिखित जवाब में जो जानकारी दी गई है, उसमें और जमीनी हकीकत में भारी विसंगति है। विधायक साहू ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई स्थानों पर मांग से कई गुना ज्यादा खाद की सप्लाई कर दी गई है, जो एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी?
विपक्ष के इन गंभीर आरोपों और जांच की मांग पर पलटवार करते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने साफ तौर पर जांच कराने से इनकार कर दिया। मंत्री नेताम ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद का वितरण पूरी तरह से पारदर्शी और स्थापित नियमों के अनुसार ही किया गया है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
विभाग के आंकड़ों को सामने रखते हुए कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि चालू सीजन में प्रदेश के भीतर कुल 14 लाख 6 हजार 555 मीट्रिक टन खाद का आवंटन किया गया है। इस कुल आवंटन में से सहकारिता क्षेत्र को 64 प्रतिशत और निजी क्षेत्र को 36 प्रतिशत खाद की सप्लाई दी गई है, जो पूरी तरह से तय मापदंडों के अनुरूप है। हालांकि, मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन में जमकर नारेबाजी की और आवंटन प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाते हुए हंगामा जारी रखा।
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16 Jul 2026
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20 Feb 2023
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