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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पिता की हत्या के मामले में दोषी बेटे को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा को कम करते हुए 10 साल की कठोर कैद में बदल दिया।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान माना कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि गुस्से में हुए विवाद के दौरान अचानक हमला हुआ। ऐसे में इसे हत्या की मंशा (इंटेंशन) से किया गया अपराध नहीं माना जा सकता।
दरअसल, मामले में ट्रायल कोर्ट ने बेटे को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सजा में संशोधन करते हुए इसे 10 साल की कठोर कैद में बदल दिया।
कोर्ट की टिप्पणी इस तरह के मामलों में ‘इरादतन हत्या’ और ‘अचानक हुए हमले’ के बीच अंतर को स्पष्ट करती है, जो सजा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
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20 Feb 2023
20 Feb 2023