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प्रशासनिक जटिलताओं को दूर करते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक 'सक्रिय मॉडल' प्रस्तुत किया है। बस्तर जिला प्रशासन ने पारंपरिक 'रिएक्टिव' रवैये को बदलकर 'प्रोएक्टिव' रुख अपनाया और खुद जनता के द्वार पहुंचकर 'फौती नामांतरण' (जमीन ट्रांसफर) के लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण किया है। इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर (12 जून 2026 तक) जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर भूमि अभिलेखों को अपडेट कर दिया गया।
इस 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' की सफलता में जमीनी स्तर पर काम करने वाले मैदानी अमले की 'त्रिमूर्ति'—ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार—ने मुख्य भूमिका निभाई। ग्राम सचिव ने पिछले 4 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की सूची तैयार की, जिसे पटवारी ने डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल 'भुइयां' से मिलान कर 8,651 मृत भू-स्वामियों की पहचान की। इसके बाद कोटवार ने गांव-गांव जाकर वारिसों के 'वंश वृक्ष' का भौतिक और सामाजिक सत्यापन किया, जिससे किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो गई।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर समय-सीमा के भीतर अंतिम आदेश पारित किए। आंकड़ों के अनुसार, जिले की 10 तहसीलों के कुल 8,651 मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों का ऑनलाइन निराकरण कर आदेश जारी किए जा चुके हैं और अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित हैं। इस मुहिम में तोकापाल तहसील सर्वाधिक 1,454 मामलों का निपटारा कर सबसे आगे रही, जबकि बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 पूर्ण कर शत-प्रतिशत लक्ष्य के करीब है।
इसी तरह जगदलपुर, बस्तर, भानपुरी, लोहण्डीगुड़ा, करपावण्ड, नानगुर, दरभा और बास्तानार तहसीलों में भी विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेख दुरुस्त किए गए।
डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) के माध्यम से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक राहत मिली है।
रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के पात्र हो गए हैं। इस चरण की अभूतपूर्व सफलता के बाद बस्तर जिला प्रशासन अब इसके अगले चरण की ओर कदम बढ़ा चुका है, जिसके तहत पिछले 10 वर्षों के लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।
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20 Jun 2026
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20 Feb 2023
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