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छत्तीसगढ़ के चर्चित और दिल दहला देने वाले झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर स्थित विशेष एनआईए (NIA) कोर्ट ने शुक्रवार, 5 सितंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों—प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम उर्फ अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़कामी देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा को दोषी करार दे दिया है। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चल रहा था, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है। 10 अगस्त को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए 101 गवाहों और साक्ष्यों की दलीलें मजबूत साबित हुईं।
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' के दौरान नक्सलियों ने दरभा घाटी के जंगल में कायराना हमला किया था, जिसमें वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं और सुरक्षाकर्मियों समेत 32 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद सियासी हलचल भी तेज हो गई है; पीसीसी चीफ दीपक बैज ने झीरम हमले को राजनीतिक षड्यंत्र और 'सुपारी किलिंग' करार दिया, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एनआईए की पूरी जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दरभा थाने की एफआईआर में नामजद प्रमुख लोगों से पूछताछ नहीं की गई और अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नक्सली प्रवक्ता गुडसा उसेंडी का बयान तक दर्ज नहीं किया गया।
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