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छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन को पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और प्रभावी बनाने के लिए साय कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए केंद्र की तर्ज पर 'स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी' (S-SNA) मॉडल को हरी झंडी दे दी है।
इस नई व्यवस्था के तहत अब विभिन्न विभागों और एजेंसियों के सैकड़ों अलग-अलग खातों में फंड ब्लॉक रखने की परंपरा खत्म होगी और प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक सेंट्रलाइज्ड 'मदर अकाउंट' होगा, जिससे जुड़े 'जीरो बैलेंस सब्सिडियरी अकाउंट' (ZBSA) के जरिए वास्तविक जरूरत के समय ही सीधे वेंडर या हितग्राही के खाते में भुगतान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे सुशासन और वित्तीय अनुशासन की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इससे उपलब्ध निधि का अधिकतम उपयोग होगा और रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। वहीं, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में विभागीय निष्क्रिय खातों में करीब 530 करोड़ और आरबीआई के DEAF खातों में लगभग 100 करोड़ रुपये निष्क्रिय पड़े रहने जैसी विसंगतियों पर लगाम लगेगी, जिससे सरकार को विकास कार्यों के लिए बेवजह बाजार से कर्ज नहीं लेना पड़ेगा और ब्याज का अनावश्यक वित्तीय बोझ घटेगा।
डिजिटल ऑडिट ट्रेल, मेकर-चेकर सिस्टम और शून्य फ्लोट (Zero Float) वाली यह छह-चरणीय प्रणाली वित्तीय धोखाधड़ी पर पूरी तरह अंकुश लगाएगी और खातों में अर्जित ब्याज सीधे राज्य की संचित निधि में जमा होगा।
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17 Sep 2026
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20 Feb 2023
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