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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना इलाके के ग्राम नकटी में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण को लेकर सोमवार सुबह से एक बड़ी और विवादित कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रशासन ने यहां बसे लगभग 80 घरों को ढहाने के लिए बुलडोजर चला दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि तोड़े जा रहे इन आशियानों में सरकारी योजनाओं के तहत बने 32 प्रधानमंत्री आवास और इंदिरा आवास भी शामिल हैं। कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने भारी हंगामा और प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे पूरे इलाके में जबरदस्त तनाव का माहौल है।
1000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की घेराबंदी, मुहर्रम की छुट्टी पर दिया था नोटिस
इस बड़ी बेदखली कार्रवाई को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने रविवार देर रात से ही पूरे नकटी गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था। मौके पर 1000 से अधिक पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसके पहले, शुक्रवार रात को मुहर्रम के शासकीय अवकाश के बावजूद राजस्व विभाग की टीम ने वार्ड नंबर 16 और 17 के घरों पर बेदखली का नोटिस चस्पा किया था, जिससे ग्रामीण पहले से ही आक्रोशित थे।
पहले भी हुआ था विरोध, भाजपा नेताओं के खिलाफ लगे थे नारे
यह पहला मौका नहीं है जब इस प्रस्तावित विधायक कॉलोनी का विरोध हुआ है। इससे पहले 26 जून को भी जब प्रशासनिक टीम पैमाइश और मुआयने के लिए गांव पहुंची थी, तब महिलाओं और स्थानीय ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर दिया था। उस दौरान ग्रामीणों ने भाजपा नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी और "वापस जाओ" के नारे लगाए थे। रात भर की कड़ी घेराबंदी के बाद सोमवार सुबह जैसे ही राजस्व विभाग की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। फिलहाल मौके पर बवाल बढ़ता जा रहा है और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है।
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