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रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) के डॉक्टरों ने जन्मजात दुर्लभ शारीरिक बनावट (PLSVC) से जूझ रही एक 41 वर्षीय महिला का सफल ऑपरेशन कर राजधानी में चिकित्सा इतिहास का नया अध्याय लिखा है।
मरीज 'कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक' (CHB) और ब्रैडीकार्डिया से पीड़ित थीं, जिससे दिल की धड़कनों को सामान्य बनाए रखने के लिए स्थायी पेसमेकर लगाना अनिवार्य था। चुनौती यह थी कि महिला में जन्मजात 'परसिस्टेंट लेफ्ट सुपीरियर वेना कावा' की स्थिति थी—यानी भ्रूण विकास के दौरान लुप्त होने वाली बाईं ओर की नस जन्म के बाद भी मौजूद थी।
सामान्य मामलों में पेसमेकर लीड दाईं शिरा से सीधे राइट एट्रियम और राइट वेंट्रिकल तक पहुंचती है, लेकिन इस दुर्लभ स्थिति में लीड को कोरोनरी साइनस और ट्राइकस्पिड वाल्व के बेहद पेचीदा रास्ते से राइट वेंट्रिकल तक ले जाना डॉक्टरों के लिए तकनीकी परीक्षा थी।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. (प्रो.) स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने इस चुनौती को मात देने के लिए जटिल 'अल्फा लूप' तकनीक का सहारा लिया। इसके तहत लीड को राइट एट्रियम में ग्रीक अक्षर 'अल्फा' (α) के आकार में विशेष घुमाव देकर सुरक्षित दिशा दी गई और डुअल चैंबर पेसमेकर को सफलतापूर्वक इम्प्लांट कर दिया गया।
इस सफल प्रक्रिया में डॉ. इनायत रिजवी, डॉ. वासु कन्नौज और डॉ. मसूद समेत पूरी तकनीकी व नर्सिंग टीम का अहम योगदान रहा। निजी अस्पतालों में लाखों खर्च कराने वाली इस अत्याधुनिक और हाई-रिस्क सर्जरी का पूरा लाभ मरीज को 'आयुष्मान भारत योजना' के तहत पूरी तरह निःशुल्क मिला और अब महिला की हालत पूरी तरह स्थिर है।
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