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CBSC कोर्स के नाम पर फर्जीवाड़ा, ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा, बड़ी कार्रवाई की तैयारी...

11 Apr 2026  

CBSC कोर्स के नाम पर फर्जीवाड़ा, ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा, बड़ी कार्रवाई की तैयारी...

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बिलासपुर में सीबीएसई कोर्स के नाम पर लंबे समय से चल रहे फर्जीवाड़े में बड़ा खुलासा हुआ है। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है और साफ तौर पर स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की है। मिशन अस्पताल रोड और व्यापार विहार स्थित दोनों शाखाओं पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिससे स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की तलवार लटक गई है। 

जांच में सामने आया कि स्कूल राज्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद खुद को सीबीएसई स्कूल बताकर संचालित कर रहा था। यह गड़बड़ी एक-दो साल नहीं, बल्कि कई वर्षों से सुनियोजित तरीके से चल रही थी। छात्रों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से पढ़ाया गया, उसी आधार पर परीक्षा पैटर्न अपनाया गया और अभिभावकों से भारी-भरकम फीस भी वसूली जाती रही, जबकि वास्तविकता इससे पूरी तरह अलग थी। 

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब छत्तीसगढ़ सरकार ने कक्षा 5 और 8 के लिए राज्य बोर्ड परीक्षा में पंजीकरण अनिवार्य किया। इसी दौरान स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को सीबीएसई पैटर्न की आंतरिक परीक्षा और राज्य बोर्ड परीक्षा में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया। यहीं से अभिभावकों को संदेह हुआ और उन्होंने इसकी शिकायत प्रशासन से की। जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल ने कभी अभिभावकों को अपनी वास्तविक मान्यता की स्थिति स्पष्ट नहीं की, जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी की 
श्रेणी में आता है। 

शिकायत मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने स्कूल का निरीक्षण किया। दस्तावेजों की जांच में मान्यता की शर्तों का खुला उल्लंघन पाया गया, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मान्यता रद्द करने की सिफारिश कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी नाराजगी जताते हुए जांच के निर्देश दिए थे। 

अब पूरा मामला शिक्षा विभाग के अंतिम निर्णय पर टिका है, लेकिन जिस तरह से जांच समिति ने स्पष्ट और कड़ी अनुशंसा की है, उससे यह तय माना जा रहा है कि स्कूल पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था में निगरानी की कमी को उजागर करता है, बल्कि अभिभावकों और छात्रों के भरोसे के साथ हुए गंभीर खिलवाड़ की भी बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है।
 

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