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Health Tips : शरीर में दिख रहे इन 6 साइलेंट लक्षणों को न करें नजरअंदाज, बड़ी बीमारी का हो सकते हैं अलार्म; जानिए इसके पीछे का कारण

20 Sep 2026  

Health Tips : शरीर में दिख रहे इन 6 साइलेंट लक्षणों को न करें नजरअंदाज, बड़ी बीमारी का हो सकते हैं अलार्म; जानिए इसके पीछे का कारण

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अक्सर हम शरीर में होने वाली हल्की थकान, त्वचा के बदलाव या वजन के उतार-चढ़ाव को सामान्य मानकर टाल देते हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, मानव शरीर किसी भी बड़ी बीमारी के गंभीर रूप लेने से हफ्तों या महीनों पहले सूक्ष्म रासायनिक और जैविक संकेत देना शुरू कर देता है। डॉक्टरों का कहना है कि इन शुरुआती ‘बायोलॉजिकल अलार्म्स’ को समय पर पहचानकर गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों से बचा जा सकता है।


1. 8 घंटे की नींद के बाद भी लगातार थकान (Chronic Fatigue)


• लक्षण: पर्याप्त आराम और संतुलित आहार के बावजूद दिनभर सुस्ती, ऊर्जा की कमी और भारीपन महसूस होना।


• साइंटिफिक कारण: कोशिकाओं में ऊर्जा (ATP) उत्पादन प्रभावित होने पर ऐसा होता है। यह विटामिन D3, विटामिन B12 या आयरन की कमी (एनीमिया) का सीधा संकेत है। इसके अलावा, थायरॉइड ग्रंथि द्वारा पर्याप्त थायरोक्सिन हार्मोन न बनाना (हाइपोथायरायडिज्म) या इंसुलिन रेजिस्टेंस भी इसका मुख्य कारण हो सकता है।


• क्या जांच कराएं: CBC (कंप्लीट ब्लड काउंट), सीरम फेरिटिन, थायरॉइड प्रोफाइल (TSH) और विटामिन प्रोफाइल।


2. बिना डाइट बदले तेजी से वजन घटना या बढ़ना


• लक्षण: जीवनशैली, खानपान या एक्सरसाइज रूटीन में बिना किसी बदलाव के अचानक 4 से 5 किलो वजन कम होना या तेजी से बढ़ना।


• साइंटिफिक कारण: अनपेक्षित रूप से वजन कम होना तब होता है जब शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल नहीं कर पाता और फैट व मांसपेशियों को तेजी से बर्न करने लगता है। यह टाइप-1 या अनकंट्रोल्ड टाइप-2 डायबिटीज का लक्षण हो सकता है। दूसरी ओर, अचानक वजन बढ़ना वाटर रिटेंशन, किडनी की कार्यप्रणाली में बाधा या हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा करता है।


• क्या जांच कराएं: फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c और लिवर/किडनी फंक्शन टेस्ट।


3. त्वचा और नाखूनों का रंग बदलना या रूखापन


• लक्षण: त्वचा का पीला पड़ना, नाखूनों का चम्मच के आकार का होना (Koilonychia), आंखों के नीचे अत्यधिक कालापन या गर्दन-कांख के पास की त्वचा का काला और मोटा होना (Acanthosis Nigricans)।


• साइंटिफिक कारण: बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर त्वचा और आंखें पीली होती हैं, जो लिवर डिस्फंक्शन या हेपेटाइटिस का संकेत है। त्वचा का डार्क और मखमली होना हाई इंसुलिन लेवल का जैविक मार्कर है, जो प्रीडायबिटीज को दर्शाता है। नाखूनों का भंगुर होना या सफेदी आना प्रोटीन, जिंक और कैल्शियम के कुअवशोषण (Malabsorption) को प्रकट करता है।


• क्या जांच कराएं: LFT (लिवर फंक्शन टेस्ट), फास्टिंग इंसुलिन।


4. लगातार तेज प्यास, बार-बार पेशाब और मुंह सूखना


• लक्षण: रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना और पानी पीने के बावजूद गले व होंठों का सूखना।


• साइंटिफिक कारण: जब रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो किडनियां अतिरिक्त शुगर को छानने के लिए खून से पानी खींचती हैं। इसे मेडिकल भाषा में ऑस्मोटिक डियूरेसिस (Osmotic Diuresis) कहा जाता है। डिहाइड्रेशन के कारण मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस लगातार प्यास का सिग्नल भेजता है।


• क्या जांच कराएं: रैंडम ब्लड शुगर और यूरीन रूटीन/माइक्रोस्कोपी।


5. सीने में भारीपन, सांस फूलना या जबड़े-गर्दन में दर्द


• लक्षण: सामान्य सीढ़ियां चढ़ने पर असामान्य रूप से सांस फूलना, सीने में खिंचाव या दर्द का बाएं हाथ, जबड़े अथवा पीठ की तरफ फैलना।


• साइंटिफिक कारण: जब कोरोनरी आर्टरीज में प्लाक जमने के कारण हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह कम होता है (मायोकार्डियल इस्केमिया), तब ये लक्षण उभरते हैं। महिलाएं और डायबिटीज के मरीज अक्सर सीने में तेज दर्द के बजाय सिर्फ सांस फूलने या एसिडिटी जैसे भारीपन की शिकायत करते हैं, जिसे 'साइलेंट इस्केमिया' कहा जाता है।


• क्या जांच कराएं: लिपिड प्रोफाइल, ECG, 2D इकोकार्डियोग्राफी या TMT।


6. लंबे समय तक पेट में गड़बड़ी या बाउल हैबिट्स में बदलाव


• लक्षण: बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार 2-3 हफ्तों तक पेट फूलना (Bloating), अपच, कब्ज या डायरिया का दौर चलना।


• साइंटिफिक कारण: आंतों के माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ने (Dysbiosis), क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में रुकावट इसका कारण हो सकती है। यह इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), सीलिएक डिजीज या आंतों में किसी तरह के पॉलीप/अल्सर का संकेत हो सकता है।


• क्या जांच कराएं: स्टूल टेस्ट, एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड।


डॉक्टर का टेक: 'प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर'


पैथोलॉजी और फिजियोलॉजी के विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर जब भी असहज महसूस कराए, तो पेनकिलर या एंटासिड खाकर लक्षण दबाने की आदत छोड़ें। साल में एक बार बेसिक प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप कराने से 80% से अधिक जीवनशैली संबंधी बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रिवर्स किया जा सकता है।
 

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