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Health Update : बदलती जीवनशैली और स्क्रीन टाइम बना बड़ा कारण, आंखों की बढ़ती ड्राइनेस पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ, पढ़िए कैसे रखें ध्यान...

05 Apr 2026  

Health Update : बदलती जीवनशैली और स्क्रीन टाइम बना बड़ा कारण,  आंखों की बढ़ती ड्राइनेस पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ, पढ़िए कैसे रखें ध्यान...

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आज के डिजिटल युग में आंखों की ड्राइनेस (Dry Eye Syndrome) एक गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के उपयोग के कारण आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और धुंधलापन जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है। 

क्या है ड्राई आई सिंड्रोम? 

चिकित्सा विज्ञान में इसे Dry Eye Syndrome कहा जाता है, जिसमें आंखों की सतह पर पर्याप्त नमी (टियर फिल्म) नहीं बन पाती या जल्दी सूख जाती है। इससे आंखों में असहजता और दृष्टि पर प्रभाव पड़ता है। 

चौंकाने वाले आंकड़े 

• World Health Organization के अनुसार, दुनिया भर में करीब 30% से अधिक लोग किसी न किसी रूप में आंखों की ड्राइनेस से प्रभावित हैं।
• भारत में All India Institute of Medical Sciences की एक रिपोर्ट बताती है कि शहरी क्षेत्रों में लगभग 40% आईटी प्रोफेशनल्स इस समस्या से जूझ रहे हैं।
• कोविड-19 महामारी के बाद स्क्रीन टाइम में 60-70% तक वृद्धि दर्ज की गई, जिससे ड्राई आई के मामलों में भी तेज इजाफा हुआ। 

मुख्य कारण 

विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की ड्राइनेस के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं—
• अत्यधिक स्क्रीन टाइम (मोबाइल, लैपटॉप)
• एयर कंडीशनर और प्रदूषण
• कम पलक झपकना (ब्लिंक रेट कम होना)
• लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग
• पानी की कमी और पोषण की कमी 

किन लोगों को ज्यादा खतरा? 

• आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले
• छात्र और ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चे
• 40 वर्ष से अधिक आयु के लोग
• महिलाएं (हार्मोनल बदलाव के कारण) 

लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें 

• आंखों में सूखापन और जलन
• बार-बार पानी आना
• धुंधला दिखना
• आंखों में भारीपन
• रोशनी से चुभन 

विशेषज्ञों की सलाह 

डॉक्टरों के अनुसार, कुछ सरल उपाय अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है—
• 20-20-20 नियम अपनाएं (हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें)
• पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
• स्क्रीन ब्राइटनेस और दूरी का ध्यान रखें
• नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं
• जरूरत पड़ने पर आर्टिफिशियल टियर (आई ड्रॉप) का उपयोग करें 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह गंभीर आंखों की बीमारियों में बदल सकती है। बदलती जीवनशैली और डिजिटल निर्भरता को देखते हुए आंखों की देखभाल अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
 

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