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तेज़ गर्मी और बढ़ता तापमान बच्चों की सेहत पर सीधा असर डालता है। इस मौसम में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, फूड पॉइजनिंग और स्किन इंफेक्शन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर इन खतरों से बच्चों को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में बच्चों के शरीर से पसीने के जरिए पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकलते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों को समय-समय पर पानी पिलाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ORS, नारियल पानी और घर के बने शर्बत जैसे पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी पूरी करने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बच्चों को तेज धूप में बाहर खेलने से बचाना चाहिए, क्योंकि इस समय हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनाना, सिर पर टोपी या छाता इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
खानपान को लेकर डॉक्टरों की स्पष्ट राय है कि गर्मियों में बच्चों को हल्का, ताजा और पौष्टिक भोजन देना चाहिए। तरबूज, खीरा, आम जैसे मौसमी फल, दही और छाछ शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। वहीं तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना कम से कम देना चाहिए, क्योंकि इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
गर्मी के मौसम में पसीना ज्यादा आने के कारण बच्चों में घमौरियां, स्किन रैश और फंगल इंफेक्शन की समस्या भी आम हो जाती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को दिन में एक से दो बार नहलाएं, साफ-सुथरे और सूती कपड़े पहनाएं तथा त्वचा को साफ और सूखा रखें।
इसके अलावा पर्याप्त नींद और आराम भी बच्चों की सेहत के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी नींद से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। यदि बच्चे में तेज बुखार, उल्टी-दस्त, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टरों का मानना है कि गर्मियों में बच्चों की देखभाल के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी सावधानियां ही उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
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20 Feb 2023
20 Feb 2023