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बोरियों में भरकर कांग्रेस भवन आता था पैसा, हवाला से जाता था दिल्ली, कोल लेवी घोटाला में अग्रवाल पर EOW का बड़ा दावा

10 Jul 2026  

बोरियों में भरकर कांग्रेस भवन आता था पैसा, हवाला से जाता था दिल्ली, कोल लेवी घोटाला में अग्रवाल पर EOW का बड़ा दावा

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को लेकर जांच एजेंसी आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। EOW का दावा है कि राज्य में पार्टी फंड के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपए की अवैध वसूली का एक बड़ा सिंडिकेट चलाया जा रहा था, जिसकी पूरी एंट्री और कैश फ्लो को मैनेज करने का जिम्मा सीधे रामगोपाल अग्रवाल के हाथों में था। 

 

इस अवैध वसूली से जुड़े कैश को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह लगा है कि यह पूरी रकम बोरियों और बड़े-बड़े कार्टनों में भरकर सीधे कांग्रेस भवन लाई जाती थी, जहां से इसे हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली भेजा जाता था। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में पेश दस्तावेजों में अग्रवाल के निजी सहायक और कांग्रेस के अकाउंटेंट देवेंद्र डड़सेना के बयानों को आधार बनाया है, जिसने अपने कबूलनामे में साफ कहा है कि वसूली का पूरा पैसा सीधे कांग्रेस भवन पहुंचता था और वहां से इस रकम का नियंत्रण और हिसाब-किताब रामगोपाल अग्रवाल ही संभालते थे।

 

EOW के मुताबिक, इस महाघोटाले से सीधे 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंची थी, जिसे लेने, संभालने और व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल करने का काम उन्होंने खुद किया था। इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ पहली बार जून 2022 में हुआ था, जब कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और उसके करीबियों के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी, जिसमें बरामद डायरियों और दस्तावेजों में अग्रवाल के नाम की सीधी एंट्री पाई गई थी।

 

इसके बाद ईडी की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने मामला दर्ज किया था, जिसमें लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार 8 जुलाई 2026 को रामगोपाल अग्रवाल ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। शुरुआती पूछताछ में उनकी फरारी के दिनों को लेकर भी बेहद दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं, जिसके मुताबिक रायपुर छोड़ने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए वे ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली समेत देश के 8 अलग-अलग राज्यों में छिपे रहे। इस लंबी फरारी के दौरान कानून की आंख में धूल झोंकने के साथ-साथ उन्होंने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे बड़े धार्मिक स्थलों की यात्रा की, वहां दर्शन किए और बकायदा विशेष पूजा-पाठ भी कराया, लेकिन इस दौरान भी वे बैकचैनल से अपने परिवार, कुछ रसूखदार नेताओं और सिंडिकेट से जुड़े बड़े कारोबारियों के साथ लगातार संपर्क में बने हुए थे, जिसके पूरे नेटवर्क की अब EOW गहराई से ततीफ़्श कर रही है।

 

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