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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन (मंगलवार) बेहद सरगर्मियों भरा होने वाला है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल कांग्रेस, विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने जा रही है।
राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास में किसी भी सरकार के खिलाफ लाया जाने वाला यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। इससे पहले अलग-अलग सरकारों के खिलाफ 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार तत्कालीन सरकारें सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रही हैं। मंगलवार को सदन में प्रस्ताव की आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष इस पर चर्चा के लिए तारीख और समय तय करेंगे।
संसदीय व्यवस्था में अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता, बल्कि इसके जरिए विपक्ष को सरकार के कामकाज, नीतियों और विफलताओं पर चौतरफा सवाल उठाने का बड़ा मंच मिलता है। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है, जिसके बाद अंत में वोटिंग (मतदान) होती है।
इस बार कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए एक लंबा आरोप पत्र तैयार किया है, जिसमें नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लचरता जैसे कई ज्वलंत मुद्दे शामिल हैं। वहीं, भाजपा सरकार भी अपनी जनहितैषी योजनाओं, विकास कार्यों और सुशासन की उपलब्धियों के दम पर विपक्ष के हर वार का करारा जवाब देने की रणनीति बना चुकी है।
अगर सदन के भीतर नंबर गेम यानी संख्या बल की बात करें, तो सियासी गणित पूरी तरह से भाजपा सरकार के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। 90 सदस्यों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में वर्तमान में सत्तारूढ़ बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। इनके अलावा 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) के हैं। इस लिहाज से बहुमत का आंकड़ा आसानी से भाजपा के पास है और सरकार को कोई खतरा नहीं है। यही वजह है कि इस अविश्वास प्रस्ताव का गणितीय असर भले ही न दिखे, लेकिन राजनीतिक रूप से इसका महत्व बहुत ज्यादा माना जा रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव के अलावा मंगलवार को प्रश्नकाल भी बेहद हंगामेदार होने के आसार हैं। विपक्ष ने जनहित से जुड़े कई तीखे सवाल पहले ही सूचीबद्ध कर रखे हैं। सदन में जल जीवन मिशन की जमीनी स्थिति, राजधानी रायपुर की पेयजल व्यवस्था में आ रही दिक्कतें, प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक दुर्घटनाएं, शराब दुकानों के संचालन की नीति, सरकारी आयोजनों में हो रहे फिजूलखर्च और प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के हजारों खाली पदों जैसे गंभीर मुद्दों पर विपक्ष सरकार से सीधे जवाब मांगेगा।
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