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आम रसोई का बजट संभालने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है, क्योंकि सरकार अब खाने के तेल की पैकेजिंग के नियमों को बेहद सख्त करने की तैयारी में है। अभी तक 1998 के पुराने एक्ट के तहत कंपनियों को तेल के पैकेट पर प्रति ग्राम या प्रति मिलीलीटर दाम लिखने की शर्त पर किसी भी साइज में तेल बेचने की छूट मिली हुई थी, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए 850 मिलीलीटर, 900 मिलीलीटर या 4.5 लीटर जैसे अजीबोगरीब साइज के पैकेट बाजार में उतार देती थीं।
इस रणनीति से आम ग्राहकों के लिए विभिन्न ब्रांड्स की कीमतों की तुलना करना और प्रति लीटर सही दाम का आकलन करना मुश्किल हो जाता था। अब सरकार इस लूपहोल को खत्म करते हुए कंपनियों की मनमर्जी पर पूरी तरह लगाम लगाने जा रही है।
नए प्रस्तावित नियमों के लागू होने के बाद, तेल निर्माता कंपनियां केवल सरकार द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड साइज यानी 500 मिलीलीटर, 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर, 5 लीटर, 10 लीटर, 15 लीटर और 20 लीटर के पैकेट ही बेच सकेंगी।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य खरीदारी में पारदर्शिता लाना है ताकि ग्राहक आसानी से अलग-अलग ब्रांड्स के बीच कीमत और मात्रा की तुलना कर सकें और किसी भी तरह के भ्रामक विपणन से बच सकें।
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