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पंडवानी क्वीन तीजन बाई का निधन, पैतृक गांव गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; पीएम मोदी ने जताया शोक

05 Jul 2026  

पंडवानी क्वीन तीजन बाई का निधन, पैतृक गांव गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; पीएम मोदी ने जताया शोक

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छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को दुनिया भर में बुलंद करने वालीं पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। शनिवार रात करीब 3:15 बजे रायपुर एम्स (AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 70 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। रविवार सुबह 11 बजे उनके पार्थिव देह को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन से लोक कला जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। 

हाथ में तंबूरा लेकर अपनी सशक्त आवाज और बेजोड़ अभिनय से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने वाली तीजन बाई को यह प्रेरणा उनके नाना से मिली थी। कला के क्षेत्र में उनके इसी असाधारण और ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीनों बड़े नागरिक सम्मानों— पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से नवाजा था। 

तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।' तीजन बाई भले ही पंचतत्व में विलीन हो गईं, लेकिन कापालिक शैली में उनकी गूंजती आवाज हमेशा देश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में अमर रहेगी।
 

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