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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में सिटी कोतवाली पुलिस की घोर लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। वार्ड नंबर 7 में फांसी लगाकर खुदकुशी की कोशिश करने वाली 44 वर्षीय देविका साहू को मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने बिना जांचे मृत मान लिया और कमरे में ताला लगाकर रवाना हो गई। करीब दो घंटे बाद जब पुलिस पंचनामे के लिए लौटी और ताला खोला गया, तब महिला जिंदा मिली और उसकी सांसें चल रही थीं। आनन-फानन में उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां वह आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत से जूझ रही है। पुलिस की इस अमानवीय लापरवाही से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, महिला ने अपने घर के अंदर रस्सी के सहारे फंदे पर लटककर जान देने की कोशिश की थी। सूचना मिलने पर सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों से पुष्टि कराए बिना ही महिला को मृत घोषित समझ लिया गया। पुलिसकर्मियों ने परिजनों को कमरे में दाखिल होने से रोक दिया और बाहर से ताला लगाकर यह कहते हुए चले गए कि वे बाद में आकर पंचनामा व आगे की कार्रवाई करेंगे। दो घंटे तक महिला उसी बंद कमरे में तड़पती रही। जब पुलिस दोबारा पहुंची और ताला खोला तो महिला जीवित पाई गई, जिसके बाद परिजनों के होश उड़ गए और वे तुरंत उसे लेकर अस्पताल भागे।
मकान मालिक और पड़ोसियों के अनुसार, महिला पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थी और पारिवारिक अनबन की बात भी सामने आई है। हालांकि, उसने यह आत्मघाती कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसका ठोस कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। वहीं, मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसे लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है। पुलिस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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