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छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के स्कूली शिक्षा ढांचे में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कक्षा पहली (Class 1) में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 6 वर्ष तय कर दी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE 2009) के दिशा-निर्देशों के तहत लिए गए इस बड़े फैसले को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी बच्चे की उम्र की गणना संबंधित शैक्षणिक सत्र के 1 अप्रैल की स्थिति के आधार पर की जाएगी, जिससे प्राथमिक स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और एकरूपता लाई जा सके।
शासन द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक, बच्चों के शुरुआती फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत करने के लिए नर्सरी से लेकर पहली कक्षा तक का पूरा एज-क्राइटेरिया बदल दिया गया है। अब नर्सरी (बालवाटिका-1) में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र 3 वर्ष से अधिक और 4 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसी तरह केजी-1 (बालवाटिका-2) के लिए 4 से 5 वर्ष और केजी-2 (बालवाटिका-3) के लिए 5 से 6 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है, जबकि कक्षा पहली में प्रवेश के समय बच्चे की उम्र 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष से कम होना अनिवार्य होगा।
हालांकि, पालकों और बच्चों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नियमों में 3 महीने की विशेष शिथिलता भी दी है। इसके तहत यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल को निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पा रहा है, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी उम्र पूरी हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन माह की छूट देते हुए संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा।
यह नया नियम राज्य के सभी सरकारी, निजी (अशासकीय) और अनुदान प्राप्त स्कूलों पर समान रूप से कड़ाई से लागू होगा। इसके साथ ही, शिक्षा का अधिकार (RTE) के अंतर्गत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले एडमिशंस पर भी यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी रहेगी। विभाग ने उन छात्रों को इस नियम से बड़ी राहत दी है जो किसी मान्यता प्राप्त स्कूल की पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary) कक्षा से पास होकर सीधे कक्षा पहली में प्रमोट हो रहे हैं, ऐसे छात्रों को उनके ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) या अंकसूची में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही सीधे प्रवेश दे दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और शाला प्रमुखों को इन नियमों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन करने तथा अभिभावकों की जानकारी के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।
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