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राजधानी रायपुर के माना इलाके के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए की गई बुलडोजर कार्रवाई का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। घरों पर बुलडोजर चलने के तीन दिन बाद भी ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। कलेक्ट्रेट के सामने धरना देने के बाद अब पीड़ित ग्रामीणों ने रायपुर में कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव कर दिया है। प्रदर्शन की उग्रता को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने शंकर नगर की ओर जाने वाली सड़क के एक हिस्से को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
इससे पहले विस्थापित ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे थे, जहां उनके इस आंदोलन में कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। ग्रामीणों ने प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी थी कि यदि शुक्रवार तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे अनिश्चितकालीन धरना और 'जेल भरो आंदोलन' शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। इसी कड़ी में मांगें पूरी न होने पर शुक्रवार को ग्रामीणों का हुजूम मंत्री के बंगले का घेराव करने पहुंच गया।
इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत भी गरमा गई है। गुरुवार को प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव खुद नकटी गांव पहुंचे थे और उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। दूसरी ओर, अपनी ही सरकार के प्रशासन के खिलाफ बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में ग्रामीणों का घर तोड़ने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सांसद ने साफ किया कि वे आज भी गांव के लोगों के साथ खड़े हैं।
गौरतलब है कि प्रशासन ने बेघर हुए प्रभावित परिवारों को रहने के लिए ईडब्ल्यूएस (EWS) मकान आवंटित किए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ये मकान सभी विस्थापितों को नहीं मिल पाए हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जो मकान दिए गए हैं, वे बेहद छोटे हैं और उनमें बड़े परिवारों का गुजारा करना नामुमकिन है। विस्थापित परिवार अब अपनी बुनियादी सुविधाओं और उचित पुनर्वास की मांग पर अड़े हुए हैं।
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03 Jul 2026
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20 Feb 2023
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