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भारत ने रेल यातायात के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पटरी पर उतार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलाई जा रही है।
सुरक्षा के लिहाज से यह ट्रेन बेहद खास है, जिसमें हाइड्रोजन लीक, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएं का तुरंत पता लगाने वाले कई आधुनिक ऑटोमैटिक सुरक्षा सिस्टम इंस्टॉल किए गए हैं। आम इलेक्ट्रिक ट्रेनों से उलट यह ट्रेन पटरी के ऊपर दौड़ने वाली बिजली की लाइनों (ओएचई) से पावर नहीं लेती, बल्कि इसके अंदर ही हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है।
रेलवे के मुताबिक, यह तकनीक पुराने जमाने की भाप और डीजल इंजन जैसी ही है, लेकिन अब कोयला या डीजल जलाने के बजाय हाइड्रोजन से क्लीन एनर्जी बनती है। इस पूरी प्रक्रिया में धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप और गर्मी निकलती है, यही वजह है कि इसे रेल यातायात का सबसे स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त माध्यम माना जा रहा है।
भारत की इस पहली हाइड्रोजन ट्रेन का खास 'नीला रंग' सिर्फ इसकी सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा और वैज्ञानिक संदेश छिपा है। दरअसल, हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह से पानी (H_2O) की तकनीक पर काम करती है, जिसके फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से सिर्फ पानी और भाप का उत्सर्जन होता है। चूंकि नीला रंग पानी, साफ आकाश और पर्यावरण की स्वच्छता का वैश्विक प्रतीक है, इसलिए दुनिया भर की हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए इसी रंग को चुना गया है।
साल 2018 में जर्मनी में शुरू हुई दुनिया की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन 'कोराडिया आईलिंट' भी ब्राइट ब्लू कलर की है। इसके अलावा कनाडा, चीन और जापान की 'हायबारी' (Hybari) जैसी हाइड्रोजन ट्रेनों का रंग भी नीला है, जिस पर पानी की बूंदों के डिजाइन बने हैं। इसी अंतरराष्ट्रीय मानक और 'ग्रीन-क्लीन टेक्नोलॉजी' को दर्शाने के लिए भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को भी आकर्षक नीले रंग में तैयार किया गया है।
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17 Jul 2026
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20 Feb 2023
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