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छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर प्रस्तुत संकल्प पर गुरुवार को जोरदार बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा लाए गए संकल्प में संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण कर तत्काल लागू करने की मांग की गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सदन के बाहर दिए गए बयानों पर चर्चा नहीं होगी और केवल सदन में प्रस्तुत विषय पर ही विचार किया जाएगा। इसके बाद चर्चा की शुरुआत करते हुए सुश्री लता उसेंडी ने संकल्प के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा कि महिला आरक्षण का यह सफर लंबे समय से चल रहा है और पूरा देश इसकी प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में विपक्ष के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका, जिससे देश की आधी आबादी का सपना अधूरा रह गया।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन प्रस्ताव का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान दिलाना है। साथ ही उन्होंने वैदिक काल की गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
चर्चा के दौरान सत्तापक्ष की ओर से केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयास गिनाए गए, जिनमें शौचालय निर्माण, नल से जल आपूर्ति और जनधन खातों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण शामिल हैं।
वहीं विपक्ष की ओर से श्री लखेश्वर बघेल ने सवाल उठाया कि यदि संकल्प पारित हो चुका है तो इसे 2029 तक लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। श्रीमती अनिला भेड़िया ने कहा कि वे 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करती हैं, लेकिन इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की जा रही है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि 543 लोकसभा सीटों पर आरक्षण लागू करने में देरी क्यों हो रही है।
सदन में हुई इस बहस के दौरान महिला सशक्तिकरण, समान प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सभी दल सहमत तो हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के तरीके और समयसीमा को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
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20 Feb 2023
20 Feb 2023