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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए की गई बुलडोजर कार्रवाई ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। सोमवार तड़के 4 बजे से ही गांव की बिजली काटकर शुरू की गई इस कार्रवाई के बाद बेघर हुए बुजुर्गों, महिलाओं और मासूम बच्चों को भारी बारिश के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने पर मजबूर होना पड़ा। सोमवार रात करीब 11:30 बजे कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय जब प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे, तो पीड़ितों का दर्द और आक्रोश छलक पड़ा।
पुनर्वास के नाम पर सिर्फ एक कमरा, न पानी है न शौचालय
बेघर हुए ग्रामीणों ने कांग्रेस नेता को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि प्रशासन पुनर्वास और सहायता के नाम पर उनके साथ भद्दा मजाक कर रहा है। प्रभावितों का आरोप है कि जिन परिवारों में 12 से 14 सदस्य हैं, उन्हें रहने के लिए महज एक छोटा सा कमरा दिया जा रहा है। हद तो यह है कि इन कमरों में न तो बिजली-पानी का कोई इंतजाम है और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में इतने बड़े परिवारों के सामने रहने और गुजर-बसर करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सांसद के आश्वासन के ठीक दो दिन बाद हुई कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार की कथनी और करनी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, इस कार्रवाई से ठीक दो दिन पहले ही डरे-सहमे ग्रामीण रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से गुहार लगाने पहुंचे थे। उस दौरान सांसद ने ग्रामीणों को बकायदा आश्वस्त किया था कि बरसात के मौसम के खत्म होने तक गांव में कोई भी तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का कोई रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस भरोसे के ठीक दो दिन बाद, सोमवार तड़के अचानक भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे बुलडोजरों ने पूरे गांव को मलबे में तब्दील कर दिया, जिससे अब विपक्षी दल भी सरकार को घेरने में जुट गए हैं।
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01 Jul 2026
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