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बस्तर पुलिस में करोड़ों का सैलरी स्कैम की इनसाइड स्टोरी, AI ऑडिट ने पकड़ी हेराफेरी, पेन ड्राइव के 'गलत इस्तेमाल' से उड़ाए सरकारी पैसे

01 Jul 2026  

बस्तर पुलिस में करोड़ों का सैलरी स्कैम की इनसाइड स्टोरी, AI ऑडिट ने पकड़ी हेराफेरी, पेन ड्राइव के 'गलत इस्तेमाल' से उड़ाए सरकारी पैसे

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छत्तीसगढ़ के बस्तर पुलिस विभाग से एक बेहद हैरान करने वाली 'इनसाइड स्टोरी' सामने आई है, जहां कानून के रखवालों ने ही सरकारी खजाने में सेंध लगा दी। पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की वेतन शाखा में तैनात तीन आरक्षकों ने सैलरी बिल्स में हेराफेरी करके करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये की सरकारी राशि सीधे अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर ली। इस हाईप्रोफाइल घोटाले का पर्दाफाश किसी इंसानी इनपुट से नहीं, बल्कि पुलिस विभाग द्वारा इस्तेमाल किए गए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल की बदौलत हुआ है। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर एसपी सलभ सिन्हा के निर्देश पर आरोपी आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और डीएसएफ आरक्षक हेमंत मैथ्यू को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।


कैसे खुली अंधी लूट की परतें? (AI आधारित टूल्स का कमाल) 

इस पूरे घोटाले के पकड़े जाने की कहानी बेहद दिलचस्प है। दरअसल, विभाग द्वारा सैलरी खर्च के नियमित ऑडिट के दौरान इस बार पारंपरिक तरीकों के बजाय AI आधारित टूल्स की मदद ली गई थी। जांच टीम ने एआई टूल्स को जरूरी प्रॉम्प्ट (कमांड) देकर पिछले 5 साल के सैलरी भुगतान का पूरा डेटा खंगालने को कहा।  जैसे ही एआई ने डेटा प्रोसेस किया, उसने पिछले 2 सालों के रिकॉर्ड में भुगतान के भीतर एक 'असामान्य बढ़ोतरी' (Anomaly) को पकड़कर फ्लैग कर दिया। एआई के इस इनपुट के बाद जब विभाग के आला अधिकारियों ने करीब एक हफ्ते तक दस्तावेजों, सैलरी बिल्स और वित्तीय रिकॉर्ड्स की कड़ाई से स्क्रूटनी की, तो इस करोड़ों के घोटाले का कच्चा चिट्ठा सामने आ गया। 

डिजिटल सिग्नेचर वाली पेन ड्राइव और भत्तों का खेल


अंदरूनी जांच में जो बात सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। आरोपी आरक्षकों—गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू—के पास ट्रेजरी (कोषालय) का काम था। इनमें से आरक्षक गिरीश राय साल 2012 से एसपी ऑफिस में तैनात था और उसकी नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। लंबे समय से एक ही जगह जमे होने के कारण उसे सिस्टम की हर कमजोरी का पता था। 

तीनों ने मिलकर आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) के डिजिटल सिग्नेचर वाली पेन ड्राइव का गलत इस्तेमाल करना शुरू किया। वे हर महीने बनने वाले सैलरी बिल्स में चुपके से अलग-अलग भत्तों (Allowances) की रकम को कई गुना बढ़ा देते थे। चूंकि पेन ड्राइव से डिजिटल सिग्नेचर वैध होते थे, इसलिए ट्रेजरी से बिल पास हो जाते थे। इसके बाद बढ़ी हुई अतिरिक्त सरकारी राशि को वे चालाकी से अपने बैंक खातों में डलवा लेते थे। 

जुर्म कबूला, अब मददगारों की तलाश 

शिकायत मिलने के बाद जगदलपुर के कोतवाली थाने में धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन का मामला दर्ज किया गया। लगातार एक हफ्ते तक चली दस्तावेजों की जांच और पुलिसिया पूछताछ के सामने तीनों आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया, जिसके बाद सोमवार (29 जून) को पुलिस ने इन्हें आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।


अब बस्तर पुलिस इस इनसाइड स्टोरी के अगले हिस्से पर काम कर रही है। विभाग की एक विशेष टीम इस बात की बारीकी से तफ्तीश कर रही है कि पिछले दो साल से चल रहे इस करोड़ों के खेल में सिर्फ यही तीन आरक्षक शामिल थे या फिर विभाग या बैंक स्तर पर कोई और बड़ा खिलाड़ी भी पर्दे के पीछे से इनकी मदद कर रहा था।
 

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