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छत्तीसगढ़ में नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया। दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ समेत कई जिलों में कांग्रेसी केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भाजपा कार्यालयों के घेराव के लिए निकले। इस दौरान कई जगह पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई।
दुर्ग में बैरिकेडिंग तोड़ी
दुर्ग में कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय से रैली के रूप में भाजपा कार्यालय की ओर बढ़े। शनिचरी बाजार के पास पुलिस द्वारा लगाई गई पहली लेयर की बैरिकेडिंग को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ दिया और आगे बढ़ गए। प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक अरुण वोरा सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे।
बिलासपुर-रायगढ़ में भी नारेबाजी
बिलासपुर और रायगढ़ में भी कांग्रेसी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। भाजपा और केंद्र सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय घेरने की कोशिश की। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 2012 में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर आरोप लगाए गए थे।
स्वामी के अनुसार, घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए यंग इंडियन लिमिटेड नाम की संस्था बनाई गई, जिसमें गांधी परिवार की बहुलांश हिस्सेदारी है। आरोप है कि यंग इंडियन के जरिए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली Associated Journals Limited (AJL) का अवैध तरीके से अधिग्रहण किया गया।
₹2000 करोड़ की संपत्ति पर कब्जे का आरोप
याचिका में दावा किया गया कि यह पूरा मामला दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित हेराल्ड हाउस की करीब ₹2000 करोड़ की संपत्ति पर कब्जे से जुड़ा है। आरोप है कि करीब ₹2000 करोड़ की कंपनी को मात्र ₹50 लाख में अपने नियंत्रण में ले लिया गया।
कांग्रेस ने इस मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए विरोध प्रदर्शन तेज करने का ऐलान किया है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह पूरी तरह कानूनी मामला है और जांच से कोई ऊपर नहीं है।
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