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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आज गणेश चतुर्थी का पर्व विधिपूर्वक आरंभ हो गया है। इस वर्ष गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक माना गया है, जबकि दूसरा शुभ समय दोपहर 1:39 से शाम 6:05 बजे तक रहेगा
पूजा विधि — शुद्धता, भक्ति और पारंपरिक सोलह उपचार
शीर्ष वैदिक विधि — षोडशोपचार पूजा — एवं उनकी स्थापना विधि निम्नलिखित है:
• पूजा हेतु स्थान की तैयारी
पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें, चौकी (वेडी) पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं, वंदनार्थ रंगोली, फूल, तोरण और लाइट्स से सजाएं।
• मूर्ति स्थापना और दिशा
गणपति जी की मिट्टी या धातु की मूर्ति को उत्तर या पूर्व facing दिशा में चौकी पर स्थापित करें।
• गंगाजल एवं पंचामृत से स्नान
पूजा स्थल एवं मूर्ति पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं।
• आवाहन—प्राणप्रतिष्ठा
नव स्थापित मूर्ति विच्छेदमुक्त रूप से आवाहन और प्राण-प्रतिष्ठा मंत्रों के साथ स्थापित की जाती है, जिससे मूर्ति पवित्रता से जीवंत हो उठती है।
• षोडशोपचार पूजा (सोलह उपचार)
इस पूजा में निम्न प्रमुख चरण शामिल हैं: आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान (जल एवं पंचामृत/दूध/दही/घी/शहद/शक्कर/तेल/शुद्ध जल), वस्त्र अर्पण, गंध, पुष्पमाला, शमी पत्र, दूर्वा, नैवेद्य (मोदक-लड्डू इत्यादि offerings), दीप, धूप, तांबूल (पान सुपारी), प्रदक्षिणा एवं पुष्पांजलि।
• मंत्रोच्चारण और आरती
“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ है, साथ ही “ॐ वक्रतुण्डाय हुम्” मंत्र का भी उपयोग विसर्जन के बाद शुभ माना जाता है।
• भोग और नैवेद्य
गणपति जी का प्रिय भोग — मोदक, लड्डू, फल, पंचमेवा आदि अर्पण करें।
• दैनिक आरती
पूजा आरंभ और संध्या समय पर नियमित दीप प्रज्वलित कर आरती करना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल की वृद्धि होती है।
सावधानियाँ
• चाँद दर्शन वर्जित — पहले दिन चंद्रमा दर्शन से संदेह एवं अशुभता होती है; इसलिए पहले दिन विशिष्ट समय में चंद्र दर्शन से बचें।
• स्थापना से पूर्व विघ्न निवारक मंत्र, संकल्प, स्नान, साफ-सफाई व सोलह उपचारों की सिद्धिपूर्वक अनुयायी करना अत्यंत आवश्यक है।
आज, 27 अगस्त 2025, की सुबह 11:05 बजे से 1:40 बजे तक का मुहूर्त घर-घर में गणेश बप्पा की विधिपूर्वक स्थापना के लिए शुभ है। भक्तों को पूजा हेतु मंत्र, सामग्री और नियमों का पालन करते हुए सोलह उपचार विधि अपनाना चाहिए। पूजा में भक्ति, शुद्धता और विधिपूर्वक सामग्री का अतिशय महत्व है। इससे घर में गणपति जी की कृपा बनी रहेगी तथा सुख, शांति और समृद्धि की वृद्धि होगी।
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20 Feb 2023
20 Feb 2023