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सर्दियों के बढ़ते असर के साथ छोटे बच्चों में श्वसन संक्रमण, निमोनिया और फ्लू के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (IAP) के अनुसार, दिसंबर–जनवरी में 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सर्दी-जुकाम और सांस की समस्या के मामले लगभग 30–40% तक बढ़ जाते हैं।
शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते बच्चे
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि छह माह से छोटे शिशु अपना तापमान खुद संतुलित नहीं कर पाते। हल्की ठंड भी उनके लिए जोखिम बन सकती है। इसलिए उन्हें एक से दो लेयर अतिरिक्त कपड़े पहनाने की सलाह दी गई है।
हीटर के अत्यधिक उपयोग से भी खतरा
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हीटर या ब्लोअर के लंबे उपयोग से कमरे की हवा बहुत सूखी हो जाती है, जिससे बच्चे की नाक और गले की नमी कम होकर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि
• कमरे में पानी का बर्तन रखें
• या ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें
धूप बच्चों को Infection Shield देती है
विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह 9 से 11 बजे की धूप में 15 मिनट तक बैठाने से बच्चों को प्राकृतिक विटामिन-D मिलता है और उनकी संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
हाथों की सफाई सबसे बड़ा हथियार
WHO के अनुसार, सर्दियों में वायरस सतहों पर लगभग 24 घंटे तक जीवित रह सकते हैं।
इसलिए
• बच्चे को पकड़ने से पहले हाथ धोना
• बच्चे के खिलौने व बोतलें रोज साफ करना
संक्रमण को काफी हद तक रोक सकता है।
छोटा बच्चा ज्यादा रोए, दूध कम पिए तो अलर्ट हो जाएं
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लक्षण खतरे का संकेत हैं:
• तेज सांस चलना
• सीने में घरघराहट
• लगातार बुखार
• बच्चा दूध न पीना या बहुत सुस्त हो जाना
इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो 24 घंटे के भीतर डॉक्टर से जांच जरूरी है, वरना निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।
पौष्टिक खानपान से बढ़ती है इम्युनिटी
डॉक्टर बच्चों को
• गुनगुना पानी
• दाल या वेजिटेबल सूप
• खिचड़ी
• संतरा, मौसमी जैसे फल
देने की सलाह देते हैं।
यह शरीर में गर्मी भी बनाए रखते हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में थोड़ी-सी लापरवाही भी छोटे बच्चों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। लेकिन सही कपड़े, साफ-सफाई, धूप और समय पर पहचान—इनसे इस मौसम को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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05 Apr 2026
20 Feb 2023
20 Feb 2023