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कमरे में जाकर भूल जाना कि क्या लेने आए थे, किसी परिचित का नाम तुरंत याद न आना या चाबियां कहीं रखकर ढूंढते रहना—ऐसी भूलचूक आम है। लेकिन जब यही स्थिति बार-बार होने लगे और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अतुल प्रसाद (वाइस चेयरमैन एंड एचओडी, न्यूरोलॉजी, BLK-Max Super Speciality Hospital) के अनुसार सामान्य भूलने और अल्जाइमर में स्पष्ट अंतर है।
क्यों भूल जाते हैं छोटी-छोटी बातें?
दिमाग लगातार काम करता है। तनाव, नींद की कमी, थकान या मल्टीटास्किंग के कारण याददाश्त पर अस्थायी असर पड़ सकता है।
सामान्य भूलचूक की पहचान
• नाम या शब्द तुरंत याद न आना, लेकिन थोड़ी देर बाद याद आ जाना
• कभी-कभार चश्मा या चाबी मिसप्लेस करना
• छोटा काम भूल जाना, जैसे कॉल बैक करना
• इन घटनाओं से दैनिक जीवन ज्यादा प्रभावित न होना
अल्जाइमर कैसे है अलग?
Alzheimer's disease एक प्रोग्रेसिव ब्रेन डिजीज है, जिसमें याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है।
अल्जाइमर के संकेत
• एक ही सवाल बार-बार पूछना
• रोजमर्रा के कामों में दिक्कत—खाना बनाना, बिल भरना, नहाना
• समय और जगह को लेकर कन्फ्यूजन
• चीजें अजीब जगह रखना और ढूंढने का तरीका भी भूल जाना
• बातचीत में सही शब्द न मिलना
• स्वभाव में बदलाव—चिड़चिड़ापन, शक, उदासी
मुख्य अंतर क्या है?
सामान्य भूलने में संकेत मिलने पर बात याद आ जाती है।
अल्जाइमर में जानकारी जैसे दिमाग से मिट जाती है—बार-बार समझाने पर भी याद नहीं रहती।
कब हो जाएं सतर्क?
• हाल की बातचीत या घटना पूरी तरह भूल जाना
• परिचित चेहरों या जगहों को पहचानने में कठिनाई
• फैसले लेने की क्षमता में गिरावट
• पैसों या नंबर से जुड़े कामों में लगातार परेशानी
ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। समय पर पहचान और इलाज से बीमारी की प्रगति को कुछ हद तक धीमा किया जा सकता है।
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