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बिहार की 243 सीटों के रुझानों ने तस्वीर लगभग साफ कर दी है। शुरुआती बढ़त में एनडीए ने ऐसा दबदबा बनाया है कि मुकाबला एकतरफा होता दिख रहा है। एनडीए 199 सीटों पर बढ़त में है, जबकि महागठबंधन सिर्फ 38 सीटों पर संघर्ष कर रहा है।
2020 के मुकाबले एनडीए को 65 से ज्यादा सीटों का बंपर फायदा मिलता दिख रहा है। वहीं लगभग इतनी ही सीटों का नुकसान महागठबंधन को हो रहा है। सबसे बड़ा चौंकाने वाला प्रदर्शन जेडीयू का है—पिछली बार 43 पर सिमटी पार्टी इस बार 75+ सीटों पर आगे चल रही है। इससे साफ है कि बिहार में नीतीश कुमार की सत्ता में धमाकेदार वापसी होती दिख रही है और वे 10वीं बार CM पद की शपथ ले सकते हैं।
बीजेपी भी इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। 91 सीटों पर आगे चल रही बीजेपी ने प्रदेश की राजनीति में अपना वर्चस्व एक बार फिर साबित कर दिया है।
उधर, महागठबंधन की हालत पतली है। आरजेडी सिर्फ 29 सीटों पर लीड ले पा रही है, जबकि 61 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस महज 4 सीटों पर आगे है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और मुकेश सहनी की वीआईपी—दोनों का खाता खुलता नहीं दिख रहा।
राघोपुर से तेजस्वी यादव पीछे चल रहे हैं, जबकि उनके भाई तेजप्रताप महुआ से पिछड़ गए हैं। एनडीए की तरफ से सम्राट चौधरी तारापुर सीट पर मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। काराकाट में पवन सिंह की पत्नी लगातार पिछड़ रही हैं। स्वतंत्र और अन्य उम्मीदवार पांच सीटों पर आगे हैं।
इस बार बिहार में दो चरणों में 67.10% वोट पड़े—यह अब तक की सबसे ज्यादा मतदान दर है, जो 2020 की तुलना में करीब 10% अधिक है। ज्यादा वोटिंग ने सत्ता विरोधी माहौल को बदला या विकास के नाम पर मतदाता एनडीए के साथ आए—इन सवालों के जवाब अंतिम नतीजे तय करेंगे। इधर, शाम 6 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचेंगे, जहां जश्न और रणनीति—दोनों पर चर्चा होगी।
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