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20 से 40 की उम्र में अचानक मौतें क्यों बढ़ रहीं ? पढ़िए AIIMS की रिसर्च का बड़ा खुलासा...

04 Jan 2026  

20 से 40 की उम्र में अचानक मौतें क्यों बढ़ रहीं ? पढ़िए AIIMS की रिसर्च का बड़ा खुलासा...

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शादी में नाचते हुए, खेलते समय या दोस्तों के साथ टहलते हुए अचानक गिरकर मौत—ऐसे वीडियो पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इससे यह डर गहराता जा रहा है कि भारत में युवाओं की अचानक मौत के मामले बढ़ रहे हैं। अब इस मुद्दे पर एम्स, नई दिल्ली की एक अहम रिसर्च सामने आई है, जिसने कई भ्रम तोड़े हैं और एक गंभीर हकीकत सामने रखी है।
एम्स ने मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच किए गए 2,214 मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम का विश्लेषण किया। इनमें से 180 मौतें यानी 8.1 प्रतिशत को ‘अचानक मृत्यु’ की श्रेणी में रखा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें 103 मौतें 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं की थीं। परिजनों के अनुसार, इन लोगों में से ज्यादातर घटना से ठीक पहले तक पूरी तरह स्वस्थ दिख रहे थे।


रिसर्च का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि युवाओं में अचानक मौत का मुख्य कारण दिल से जुड़ी बीमारियां हैं। कुल मामलों में 42.6 प्रतिशत मौतें हृदय रोग के कारण हुईं। पोस्टमॉर्टम में कई युवाओं की हृदय धमनियों में 70 प्रतिशत से अधिक रुकावट पाई गई। सबसे ज्यादा असर लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) आर्टरी में देखा गया, जिसे जानलेवा हार्ट अटैक से जोड़ा जाता है। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से अधिकतर युवाओं ने न तो कभी दिल की जांच करवाई थी और न ही कोई हार्ट से जुड़ी दवा ली थी।


रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हर पांचवीं अचानक मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। 21.3 प्रतिशत मामलों में पूरी जांच के बाद भी मौत का ठोस कारण नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में दिल की इलेक्ट्रिकल या रिदम से जुड़ी गड़बड़ियां जिम्मेदार हो सकती हैं, जो सामान्य पोस्टमॉर्टम में पकड़ में नहीं आतीं।
एम्स की स्टडी के अनुसार, अचानक मौतें सिर्फ हार्ट अटैक तक सीमित नहीं हैं। 

 

युवाओं में 21.3 प्रतिशत मौतें सांस से जुड़ी बीमारियों, जैसे निमोनिया और टीबी, के कारण हुईं। शराब के आदी लोगों में नींद के दौरान उल्टी से दम घुटने के मामले भी सामने आए। महिलाओं में फटी हुई एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और गर्भाशय फटने जैसी स्थितियों से भी अचानक मौत दर्ज की गई।
रिसर्च में यह भी पता चला कि 55 प्रतिशत से अधिक मौतें घर पर हुईं, जबकि करीब 30 प्रतिशत मौतें यात्रा के दौरान हुईं।

 

 लगभग 40 प्रतिशत मौतें रात या तड़के के समय हुईं। परिजनों ने मौत से पहले अचानक बेहोशी, सीने में दर्द, सांस फूलना और पेट दर्द जैसे लक्षण बताए। इससे यह संकेत मिलता है कि युवाओं में हार्ट अटैक हमेशा पारंपरिक लक्षणों के साथ नहीं आता।


कोविड वैक्सीन को लेकर फैल रही आशंकाओं पर भी एम्स की रिसर्च ने स्थिति स्पष्ट की है। अध्ययन में कोविड संक्रमण या टीकाकरण और अचानक मौतों के बीच कोई सीधा या महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया। लगभग सभी आयु वर्ग के लोगों ने वैक्सीन लगवाई थी, लेकिन मौतों का पैटर्न इससे जुड़ा नहीं मिला।


PSRI हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. के.के. तलवार के अनुसार, यह अध्ययन युवाओं में समय से पहले होने वाली कोरोनरी आर्टरी डिजीज की गंभीरता को दिखाता है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में जेनेटिक जांच और परिवार के अन्य सदस्यों की स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।


एम्स का निष्कर्ष साफ है कि युवाओं की मौतें बिना कारण नहीं हो रहीं, बल्कि उनके शरीर में बीमारियां लंबे समय से चुपचाप पनप रही होती हैं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित हृदय जांच, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा परिवार स्तर पर स्क्रीनिंग ही ऐसी अचानक होने वाली त्रासदियों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
 

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